Sunday, December 5, 2021

राष्‍ट्र ने आज संविधान दिवस मनाया। प्रधानमंत्री ने कहा – कर्तव्‍यों का महत्‍व भारतीय संविधान की खास खूबी

संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अंगीकृत करने के अवसर पर यह दिन पूरे देश में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन राष्‍ट्रीय कानून दिवस के रूप में  भी मनाया जाता है। देश के वर्तमान संविधान को 26 नवम्‍बर 1949 को संविधान सभा द्वारा औपचारिक रूप से अंगीकृत करने के बाद इसे 26 जनवरी 1950 में लागू किया गया। संविधान प्रारूप समिति के अध्‍यक्ष के रूप में डॉक्‍टर बी.आर.आम्‍बेडकर की महत्‍वपूर्ण भूमिका को नमन करने के लिए 2015 में सरकार ने पहली बार यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। यह संविधान भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है, जो अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है तथा भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। यह दुनिया के किसी भी संप्रभु देश का सबसे लंबा लिखित संविधान  है।

 

श्री मोदी ने कहा कि भारतीय संविधान की कई विशेषताएं हैं, लेकिन इन सब में एक खास विशेषता कर्तव्यों के महत्व की है। उन्होंने कहा कि गांधी जी मानते थे कि अधिकारों और कर्तव्यों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं और इसलिए जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकार स्वतः ही सुरक्षित हो जाएंगे।

 

इस दो दिवसीय सम्‍मेलन का राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कल उद्घाटन किया था। सम्‍मेलन मे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित कई लोग उपस्थित हैं।

 

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के आयोजन की शुरूआत 1921 में की गई थी। इस साल इसका शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस वर्ष के सम्मेलन का विषय – विधायिका, कार्यकारी और न्यायपालिका के बीच सामंजस्यपूर्ण समन्वय – एक जीवंत लोकतंत्र की कुंजी है।

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