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Last Updated : Nov 15 2019 6:14AM     Screen Reader Access
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Supreme Court refers review petitions on Sabarimala to 7-Judge Bench            PM Modi stresses need to focus on trade and investment among BRICS nations            Apex court dismisses all review petitions on Rafale fighter jets issue            Home Minister Amit Shah says SC’s Rafale decision befitting reply to malicious campaigns            Delhi NCR air quality continues to remain severe           

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दोपहर समाचार

1415 HRS
09.11.2019
मुख्य समाचार :-
  • उच्‍चतम न्‍यायालय ने अयोध्‍या मामले पर सर्वसम्‍मत  फैसला सुनाते हुए मंदिर निर्माण के लिए विवादित भूमि केन्‍द्र द्वारा गठित एक ट्रस्‍ट को सौंपने का आदेश दिया।
  • सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि दी जायेगी।
  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा - इस फैसले से न्‍याय प्रक्रिया में लोगों का विश्‍वास मजबूत होगा।
  • प्रधानमंत्री ने पंजाब में डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर की एकीकृ‍त चौकी का उद्घाटन किया।
  • चक्रवात बुलबुल से ओडि़सा तथा पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में भारी बारिश।

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उच्‍चतम न्‍यायालय ने सर्वसम्‍मति से निर्णय देते हुए अयोध्‍या में विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्‍त किया। एक ऐतिहासिक और महत्‍वपूर्ण निर्णय देते हुए पांच सदस्‍यों की संविधान पीठ ने मुख्‍य न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में करीब एक सदी पुराने विवाद का निपटारा कर दिया। एक रिपोर्ट-


सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में अयोध्‍या में विवादित जमीन को केन्‍द्र को सौंपे जाने का निर्णय किया। साथ ही मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्‍ट का गठन किया जाएगा। मुस्लिम समुदाय को उनकी मजिस्‍द के लिए पांच एकड़ जमीन दी जाएगी। न्‍यायालय ने केन्‍द्र तथा उत्‍तर प्रदेश सरकार को मस्जिद निर्माण के लिए प्रमुख स्‍थान पर मुस्लिम समुदाय के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने दो दशमलव सात सात एकड़ विवादित भूमि राम लला को आवंटित की। न्‍यायालय ने निर्मोही अखाड़े की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें विवादित जमीन पर नियंत्रण की मांग की गई थी । न्‍यायालय ने यह भी कहा कि विवादित स्‍थल के नीचे की संरचना इस्‍लामिक संरचना नहीं है। सुपर्णा के साथ आनंद कुमार, आकाशवाणी समाचार, दिल्‍ली।



एक हजार से अधिक पृष्‍ठों के अपने फैसले में अदालत ने कहा कि हिन्‍दुओं के इस विश्‍वास को लेकर कोई विवाद नहीं है कि भगवान राम का जन्‍म ध्‍वस्‍त ढांचे के स्‍थान पर हुआ था। न्‍यायमूर्ति एस.ए. बोब्‍डे, डी.वाई चन्‍द्रचूड, अशोक भूषण और एस. अब्‍दुल नज़ीर की खंड पीठ ने कहा कि विवादित दो दशमलव सात-सात एकड़ भूमि का मालिकाना हक रामलला को सौंपा जाएगा, जो इस मुकदमें के तीन पक्षकारों में से एक है पंरतु यह भूमि केंद्र सरकार के रिसीवर के कब्‍जे में रहेगी। यह ऐतिहासिक निर्णय इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के 2010 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में दाखिल की गई 14 अपीलों के संदर्भ में सुनाया गया। उच्‍चतम न्‍यायालय ने कहा कि हिन्‍दू अपना यह दावा सिद्ध करने में सफल रहे कि बाहरी प्रांगण उनके कब्‍जे में था और उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड अपना दावा सिद्ध करने में विफल रहा।


अदालत ने कहा कि विवादित स्‍थल पर बाहरी प्रांगण में हिन्‍दुओं द्वारा व्‍यापक पूजा की जाती रही और साक्ष्‍यों से पता चलता है कि मुसलमान मस्जिद में जुम्‍मे की नमाज अदा करते थे, जिससे पता चलता है कि उन्‍होंने स्‍थल का कब्‍जा नहीं छोड़ा था। अदालत ने ये भी कहा कि अयोध्‍या में विवादित स्‍थल के नीचे जो भी ढांचा था वह इस्‍लामिक नहीं था, लेकिन भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण- एएसआई ने यह सिद्ध नहीं किया है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। अदालत ने कहा कि एएसआई के साक्ष्‍यों को राय मात्र कहना इस संगठन के प्रति न्‍यायोचित नहीं है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में शिया वक्‍फ बोर्ड की अपील यह कहकर नामंजूर कर दी कि राजस्‍व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकार की है।

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अयोध्‍या भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान उच्‍चतम न्‍यायालय के अंदर के माहौल पर हमारी संवाददाता की एक रिपोर्ट-


अयोध्‍या भूमि विवाद मामले में एक ओर उच्‍चतम न्‍यायालय अपना फैसला सुनने की तैयारी में था तो दूसरी ओर अदालत में वकीलों की भीड़ उमड़ रही थी। न्‍यायालय कक्ष में बड़ी संख्‍या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद पूरा माहौल शांत था। मामले के तीनों पक्षों के प्रतिनिधि न्‍यायालय कक्ष में उपस्थित थे। वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राजीव धवन और के. पारासरण भी न्‍यायालय में दिखाई दिए। उच्‍चतम न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई ने वकीलों और मीडिया के लोगों से खामोशी बनाये रखने के लिए कहा। फैसले के दौरान फोटोग्राफी की अनुमति नहीं थी। समाचार कक्ष से नईम अख़तर।



अयोध्‍या भूमि विवाद मामले की पृष्‍ठ‍भूमि पर हमारी संवाददाता की एक रिपोर्ट-


अयोध्‍या भूमि विवाद में मध्‍यस्‍थता का प्रयास विफल हो जाने के बाद प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में पांच सदस्‍यीय संविधान पीठ ने इस मामले में छह अगस्‍त से रोजाना सुनवाई शुरू की थी। पीठ ने लगातार चालीस दिन इस मामले की सुनवाई की। 16 अक्‍तूबर को न्‍यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इस विवाद में तीन प्रमुख पक्ष हिंदु महासभा, निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम वक्‍फ बोर्ड हैं। सुपर्णा सेकिया की रिपोर्ट के साथ समाचार कक्ष से भवतारिणी।


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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि वो अयोध्‍या भूमि विवाद मामले पर उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का सम्‍मान करता है लेकिन इससे संतुष्‍ट नहीं है। मीडिया के साथ बातचीत में बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने लोगों से शांति और सद्भाव बनाये रखने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि फैसले के अध्‍ययन के बाद बोर्ड पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लेगा।

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अयोध्‍या मामले के पक्षकारों में से एक इकबाल अंसारी ने अयोध्‍या मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय का स्‍वागत किया है और कहा है कि वे इससे शत-प्रतिशत संतुष्‍ट हैं।


हम इससे पहले भी कहते रहे है कि हम कोर्ट का सम्‍मान करते हैं। आज भी कोर्ट का सम्‍मान कर रहे हैं। ये मसला गर सरकार ने तय कर दिया, समझ लो बड़ी अच्‍छी बात है। हम पूरे देश को संदेश देना चाहते हैं कि ये मसअला जो है कोर्ट ने तय कर दिया। इसको आप मान लीजिए हिन्‍दु हो चाहे मुसलमान। 


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उत्‍तर प्रदेश में सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने अयोध्‍या भूमि विवाद के बारे में उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय का स्‍वागत किया है। बोर्ड के अध्‍यक्ष जफर फारुकी ने आकाशवाणी को बताया कि वे दिल से इस फैसले का स्‍वागत करते हैं।


जो भी अभी फैसला दिया है माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने हम उसका दिल से स्‍वागत करते हैं और उसका अनुपालन करेंगे और सभी को इसका स्‍वागत करना चाहिए।


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निर्मोही अखाड़े के प्रवक्‍ता कार्तिक चौपड़ा ने कहा है कि अखाड़ा उच्‍चतम न्‍यायालय का आभारी है कि उसने राम मन्दिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए केन्‍द्र द्वारा स्‍थापित किये जाने वाले ट्रस्‍ट में अखाड़े को प्रतिनिधित्‍व की बात कही है।


सर्वोच्‍च न्‍यायालय से चाहे जो निर्णय आ गया है वो हमारे लिए स्‍वागत है, क्‍योंकि रामजी विराजमान हैं। पूजा पाठ हो रही है तो जो चीज देश के लिए इतना सद्भावना प्रेम रहा। सबको सफलता मिल गया।  हर प्रकार से हमारे लिए ठीक है।


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हिन्‍दू महासभा के वकील वरूण कुमार सिन्‍हा ने कहा है कि यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने इस फैसले से विविधता में एकता का संदेश दिया है।

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देशभर में राजनीतिक नेताओं, विद्वानों और धर्म गुरूओं ने लोगों से अपील की है कि वे रामजन्‍म भूमि - बाबरी मस्जिद मामले में उच्चतम न्‍यायालय के फैसले को देखते हुए शांति और सद्भाव बनाए रखें। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि उच्‍चतम न्‍यायालय ने अयोध्‍या भूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले को किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्‍होंने लोगों से शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से न्‍यायिक प्रक्रिया में आम आदमी का विश्‍वास और ज्‍यादा मजबूत होगा। केन्‍द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उच्‍चतम न्‍यायालय के सर्वसम्‍मत निर्णय का स्‍वागत किया है। एक ट्वीट संदेश में गृहमंत्री ने सभी समुदाय और धर्मों के लोगों से अपील की है कि वे इस निर्णय को स्‍वीकार करें और शांति तथा सौहार्द बनाये रखें।  रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की।

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सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज कहा है कि अयोध्‍या के बारे में उच्‍चतम न्‍यायालय का फैसला ऐतिहासिक, संतुलित और न्‍यायसंगत है।

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राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के अध्‍यक्ष मोहन भागवत ने कहा है कि संघ न्‍यायालय के फैसले का स्‍वागत करता है। उन्‍होंने कहा कि हम सारे तथ्‍यों का अभिनंदन करते हैं और इस निर्णय को जय पराजय की नजर से नहीं देखना चाहिए।

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कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि अयोध्‍या मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय का सम्‍मान करती है। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मुख्‍य प्रवक्‍ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में है। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविन्‍द केजरीवाल ने अयोध्‍या फैसले का स्‍वागत करते हुए लोगों से शांति बनाये रखने की अपील की है।

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धर्मगुरू श्री श्री रवि शंकर ने अयोध्‍या फैसले का सम्‍मान करते हुए कहा कि इससे दोनों समुदाय के लोगों को खुशी और राहत मिली है।

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राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक आयोग के प्रमुख सैयद जी एच रिज़वी ने आज कहा है कि उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले से मुस्लिम समुदाय खुश हैं। उन्‍होंने कहा है कि इस बारे में मुसलमान किसी के बहकावे में नहीं आयेंगे।

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उत्‍तर प्रदेश में लोगों ने उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय का व्‍यापक रूप से स्‍वागत किया है। इस बारे में और जानकारी लेने के लिए आइए चलते हैं हमारे संवाददाता सुशील चंद्र तिवारी के पास-


प्रश्‍न-1 सुशील अयोध्‍या में कानून-व्‍यवस्‍था की अभी क्‍या स्थिति हैं?


निखिल देखिए अयोध्‍या में पूरी तरह से शांति है और कही से भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई खबर नहीं है और हमने थोड़ी देर पहले अयोध्‍या के जिला अधिकारी और पुलिस प्रधान से बातचीत की थी जो लगातार पूरे शहर का भ्रमण करके हालात का जायजा ले रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि चप्‍पे-चप्‍पे पर पुलिस अपनी निगाह बनाए हुए है और किसी को भी किसी किस्‍म का जुलूस निकालने या प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है। हालात यहां पूरी तरह से नियंत्रण में है और लोग भाईचारे के साथ रह रहे हैं। निखिल।



प्रश्‍न-2 सुशील आम जनता में इस फैसले का क्‍या असर दिखाई दे रहा है।


जी निखिल, हमने कई स्‍थानीय लोगों के बात की, जिनमे पुजारी, दुकानदार और छात्र भी शामिल थे। वो सब लोग फैसले के आजाने से बेहद खुश नजर आए और उन्‍होंने इस बात पर सेतोष व्‍यक्‍त किया कि सदियों से लटके हुए मामले का आखिरकार कोई समाधान निकल आया। हर किसी ने आपस में मिलजुलकर रहने की बात की और उम्‍मीद जताई कि अब अयोध्‍या का विकास होगा और इस पवित्र जगह का नाम किसी विवाद से नहीं जोडा जाएगा। निखिल । 

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने राज्‍य कंट्रोल रूम का दौरा किया और आवश्‍यक निर्देश जारी किए। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों में ना आएं।

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तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री के. पलनीसामी ने कहा कि राज्‍य में हवाई अड्डों, रेलवे स्‍टेशनों और अन्‍य महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर कड़ी सुरक्षा व्‍यवस्‍था की गई है। नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्‍मू - कश्‍मीर में कल मध्‍यरात्रि से निषेधाज्ञा लगा दी गई। महाराष्‍ट्र में मुंबई में प्रसिद्ध हाजी अली और माहिम दरगाह ट्रस्टियों ने लोगों से उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की है। ओडि़सा, मध्‍य प्रदेश और गुजरात में अदालत के फैसले के बाद सुरक्षा व्‍यवस्‍था कड़ी कर दी गई है।

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि करतारपुर गलियारे और एकीकृत जांच चौकी के खुलने से दोगनी खुशी मिली है। वे आज करतारपुर गलियारे के उदघाटन के बाद गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक पर श्रद्धालुओं को सम्‍बोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि करतारपुर गलियारे के खुलने के बाद दरबार साहिब गुरूद्वारा पर मत्‍था टेकना सरल हो जायेगा। उन्‍होंने भारत की इस भावना को समझने के लिए पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का धन्‍यवाद किया।


पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री श्रीमान इमरान खान जी का भी धन्‍यवाद करता हूं कि उन्‍होंने करतारपुर कॉरिडोर के विषय में भारत की भावनाओं को समझा, सम्‍मान दिया और उसी भावना के अनुरूप कार्य किया।


प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरू नानक देव मानवता के लिए पूज्‍य और प्रेरणा स्रोत हैं।

गुरू नानक देव जी सिर्फ भारत की ही धरोहर नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा पुंज है। गुरू नानक देव एक गुरू होने के साथ-साथ एक विचार है। जीवन का आधार है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि जब गुरू नानक देव ने करतारपुर को छोड़ा था किसी को नहीं मालूम था कि वे समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे। और ब्‍यौरा हमारे संवाददाता से-


प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि वे डेरा बाबा नानक की धरती पर आकर धन्‍यता का अनुभव कर रहे हैं और कॉरिडोर को देश को समर्पित करते हुए उन्‍हें सेवा जैसी अनुभूति हो रही है। उन्‍होंने शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा दिए गए कौमी सेवा पुरस्‍कार को महान संत परंपरा के तेज और तपस्‍या का प्रसाद बताया और इसे श्री गुरू नानक देव जी के चरणों में समर्पित किया। श्री मोदी ने कहा कि गुरू नानक देव जी सिखपंथी या भारत की ही धरोहर नहीं, पूरी मानवता के पुंज हैं। उन्‍होंने कहा कि देश के विचार मूल्‍य, संस्‍कृति, सोच, तर्क, बोलवानी गुरू नानक देव जी जैसी पुण्‍यआत्‍माओं द्वारा दी गई है। श्री मोदी ने कहा कि गुरू जी ने भारत की चेतना को जगाया और इसके लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्‍होंने सेवा, भाईचारा, कीर्त करो, वंड छक्‍को का  संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर 550 रूपये का एक यादगारी सिक्‍का और पांच यादगारी डाक टिकटें भी जारी कीं। अश्‍विनी कुमार शर्मा, आकाशवाणी समाचार, डेरा बाबा नानक।

इस बीच, सिख यात्रियों का पहला जत्‍था कुछ देर पहले ही करतारपुर गलियारे से पाकिस्‍तान में दाखिल हो गया है। इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने आज सुबह पंजाब के सुल्‍तानपुर लोधी में गुरूद्वारा बेरसाहिब में मत्‍था टेका।

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चक्रवात बुलबुल सघन होकर गंभीर चक्रवात में बदल गया है। इसके असर से पश्चिम बंगाल और ओडिसा के उत्‍तरी जिलों में भारी वर्षा हो रही है। बुलबुल तूफान आज सुबह पारादीप से 98 किलोमीटर दूर पूर्व-पूर्वोत्‍तर तथा पश्चिम बंगाल के सागरद्वीप से 137 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में केन्द्रित था। बुलबुल चक्रवाती तूफान की विभीषिका को कम करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार युद्ध स्‍तर पर कार्य कर रही है। इस चक्रवाती तूफान के आज रात राज्‍य में पहुंचने की संभावना है।

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